लोक सेवाओं का अधिकार एवं अन्य सेवाएँ, बिहार सरकार
RTPS & Other Services, Govt of Bihar
RTPS & Other Services, Govt of Bihar
EN
हि
नागरिक सेवाएँ
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र का निर्गमन (केन्द्र सरकार के प्रयोजनार्थ)- अंचल स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र का निर्गमन (केन्द्र सरकार के प्रयोजनार्थ)- अनुमंडल स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र का निर्गमन (केन्द्र सरकार के प्रयोजनार्थ)- जिला स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र का निर्गमन (बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ) - अंचल स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र का निर्गमन (बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ)- अनुमंडल स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
नॉन क्रीमी लेयर प्रमाण-पत्र का निर्गमन (बिहार सरकार के प्रयोजनार्थ)- जिला स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आय और संपत्ति प्रमाण-पत्र का निर्गमन- अंचल स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आय और संपत्ति प्रमाण-पत्र का निर्गमन- अनुमंडल स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आय और संपत्ति प्रमाण-पत्र का निर्गमन- जिला स्तर पर
21 कार्य दिवस
अभी आवेदन करें
विभागीय सेवाएँ
घोषणाएं
सभी देखें ›
अक्सर पूछे जाने वाले सवालं
रजिस्ट्रेशन से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने और कानूनी नियमों का पालन करने के लिए प्रतिष्ठानों की पहचान करना संभव हो जाता है।
नहीं। रजिस्ट्रेशन से संस्थान की पहचान होती है, जबकि अलग-अलग स्कीम के तहत कवरेज उनकी खास पात्रता शर्तों पर निर्भर करता है।
नहीं। आम तौर पर, तय ढांचे के तहत हर संस्थान को एक अलग रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है।
माइग्रेशन या नया रजिस्ट्रेशन सरकार की सूचनाओं और कोड के तहत ट्रांज़िशनल प्रावधानों पर निर्भर करता है।
हाँ। रजिस्ट्रेशन को लेबर आइडेंटिफिकेशन नंबर (LIN) और लेबर एडमिनिस्ट्रेशन के दूसरे सिस्टम के साथ जोड़ा जा सकता है।
सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन से ही योगदान की राशि तय नहीं होती; देनदारियाँ लागू सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत बनती हैं।
विलय, विभाजन या पुनर्गठन के कारण होने वाले परिवर्तनों की रिपोर्ट निर्धारित तरीके से दी जानी चाहिए ताकि सटीक पंजीकरण रिकॉर्ड बनाए रखा जा सके।
OSH कोड और लागू राज्य नियमों के तहत तय सीमा से ज़्यादा कॉन्ट्रैक्ट लेबर रखने से पहले लाइसेंस लेना ज़रूरी है।
कॉन्ट्रैक्ट लेबर (ठेके पर रखे गए मज़दूरों) को काम पर लगाने से पहले लाइसेंस लेना उस कॉन्ट्रैक्टर की ज़िम्मेदारी है जो उन्हें काम पर रख रहा है।
नहीं। मुख्य नियोक्ता को संस्थान का रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जबकि ठेकेदार को कॉन्ट्रैक्ट लेबर लाइसेंस लेना होता है, जहाँ भी यह लागू हो।
नहीं। आम तौर पर, हर एस्टैब्लिशमेंट और हर कॉन्ट्रैक्ट के लिए अलग लाइसेंस की ज़रूरत होती है, जब तक कि लागू नियमों के तहत इसकी इजाज़त न हो।
हाँ। लाइसेंस में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखे जा सकने वाले कर्मचारियों की अधिकतम संख्या बताई गई है।
नहीं। मंज़ूर की गई संख्या से ज़्यादा लोगों को काम पर रखने के लिए लाइसेंस में बदलाव या संशोधन की ज़रूरत होती है, जैसा भी लागू हो।
अगर ज़रूरी हो, तो कॉन्ट्रैक्टर को लाइसेंस की वैलिडिटी खत्म होने से पहले उसे रिन्यू या एक्सटेंड करवा लेना चाहिए।
हाँ, जहाँ लागू नियम अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट या कामों के लिए अलग-अलग लाइसेंस की माँग करते हैं।
हाँ। सक्षम अधिकारी नियमों के उल्लंघन, गलत जानकारी देने या कानूनी शर्तों का पालन न करने पर लाइसेंस को सस्पेंड या रद्द कर सकता है।
सब-कॉन्ट्रैक्टिंग कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों और लागू लेबर कानूनों के अधीन है, और ज़रूरत पड़ने पर मंज़ूरी की आवश्यकता हो सकती है।
बिहार राज्य प्रवासी श्रमिक दुर्घटना अनुदान योजना के तहत बताई गई पात्रता शर्तों को पूरा करने वाला श्रमिक।
हाँ, बशर्ते दुर्घटना और लाभार्थी योजना के तहत तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हों।
हाँ। पात्र दुर्घटना के कारण होने वाली मृत्यु पर योजना के प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाता है।
योग्यता, योजना के तहत बताई गई रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन की ज़रूरतों पर निर्भर करती है।
नहीं। यह ग्रांट खास तौर पर दुर्घटना से हुई मौत के उन मामलों के लिए है जो इसके लिए योग्य हैं।
अगर दूसरी शर्तें पूरी होती हैं, तो कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए नौकरी करने से पात्रता पर अपने-आप कोई असर नहीं पड़ता।
नहीं। ग्रांट आम तौर पर स्कीम के तहत तय किए गए योग्य नॉमिनी या कानूनी दावेदार को जारी की जाती है।
एम्प्लॉयर से मिलने वाले मुआवज़े के साथ इसका तालमेल स्कीम के प्रावधानों के तहत तय होता है।
हाँ। सहायता मंज़ूर करने से पहले रोज़गार, माइग्रेशन की स्थिति और दुर्घटना से जुड़ी जानकारी की जाँच की जा सकती है।
दुर्घटना की परिस्थितियों के आधार पर पुलिस रिकॉर्ड या अन्य सहायक सबूतों की ज़रूरत पड़ सकती है।
स्कीम के तहत परिभाषित पात्र दुर्घटनाओं के कारण होने वाली स्थायी पूर्ण या स्थायी आंशिक विकलांगता।
हाँ। सहायता, योजना के तहत तय की गई विकलांगता की प्रमाणित श्रेणी या प्रतिशत पर आधारित होती है।
हाँ। जब तक अलग से न कहा गया हो, सहायता मिलने से भविष्य में नौकरी पाने पर अपने-आप कोई रोक नहीं लगती।
कवरेज स्कीम में शामिल खास प्रावधानों और परिभाषाओं पर निर्भर करता है।
हाँ। आम तौर पर, विकलांगता का सर्टिफ़िकेट सक्षम मेडिकल बोर्ड या अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी किया जाना चाहिए।
संशोधन, योजना में शामिल पुनर्मूल्यांकन के प्रावधानों (यदि कोई हों) के अधीन है।
एक से ज़्यादा दावों पर स्कीम के तहत तय की गई सीमाएँ और पात्रता की शर्तें लागू होती हैं।
एक साथ कई लाभ पाने की पात्रता संबंधित योजनाओं के प्रावधानों पर निर्भर करती है।
नहीं। प्रोस्थेटिक डिवाइस (कृत्रिम अंग) के इस्तेमाल से सर्टिफाइड विकलांगता अपने-आप नहीं बदलती, जब तक कि सक्षम अधिकारी द्वारा उसका दोबारा मूल्यांकन न किया जाए।
OSH कोड और राज्य के नियमों के तहत 'फ़ैक्ट्री' की श्रेणी में आने वाले परिसर में मैन्युफ़ैक्चरिंग का काम शुरू करने से पहले फ़ैक्ट्री लाइसेंस लेना ज़रूरी है।
नहीं। फ़ैक्ट्री बिल्डिंग प्लान को मंज़ूरी देना और फ़ैक्ट्री लाइसेंस देना, दोनों अलग-अलग कानूनी ज़रूरतें हैं।
हाँ। आम तौर पर हर फ़ैक्टरी परिसर के लिए अपना लाइसेंस होना ज़रूरी है।
नहीं। खतरनाक प्रक्रियाओं में शामिल कारखानों को ऐसी गतिविधियां शुरू करने से पहले अतिरिक्त कानूनी आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
सुरक्षा से जुड़े गंभीर उल्लंघनों, गलत घोषणाओं या कानूनी प्रावधानों का लगातार पालन न करने पर लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है।
नहीं। यह लाइसेंस लेबर सेफ़्टी और फ़ैक्टरी नियमों के पालन को प्रमाणित करता है, न कि प्रोडक्ट की क्वालिटी या मैन्युफ़ैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स को।
नवीनीकरण यह सुनिश्चित करता है कि मौजूदा लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद भी फैक्ट्री कानूनी रूप से काम करती रहे।
हाँ। अनुपालन इतिहास, निरीक्षण के निष्कर्ष और पिछली टिप्पणियों के सुधार पर विचार किया जा सकता है।
हाँ। जहाँ भी लागू हो, अथॉरिटी तय किए गए फ़ायर सेफ़्टी उपायों के पालन की जाँच कर सकती है।
जी हाँ। नवीनीकरण में मूल लाइसेंस जारी होने के बाद लागू की गई नई वैधानिक शर्तें शामिल हो सकती हैं।
हाँ। फ़ैक्टरी को ओरिजिनल लाइसेंस से जुड़ी सभी शर्तों का पालन करते रहना होगा, जब तक कि अथॉरिटी उनमें कोई बदलाव न करे।
सभी 26 सेवाओं के लिए बिहार वन वेब पोर्टल, BiharOne मोबाइल ऐप या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के ज़रिए व्यक्तिगत रूप से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।
जहाँ आधार से जुड़ा या पहले से जमा किया गया डेटा उपलब्ध है, वहाँ बिहार वन एप्लीकेशन फ़ॉर्म को अपने-आप भर देता है और फ़ाइनल सबमिशन से पहले सुधार के लिए विसंगतियों को चिह्नित करता है।
हाँ। यह पोर्टल ऑटो-सेव होने वाले ड्राफ़्ट एप्लीकेशन को सपोर्ट करता है, इसलिए आप बिना दोबारा डेटा डाले अधूरे भरे हुए फ़ॉर्म को वहीं से आगे भर सकते हैं।
हर सर्विस के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट अलग-अलग होते हैं; 26 सर्विस में से हर एक के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंट की लिस्ट इस FAQ के डिपार्टमेंट-वाइज़ सेक्शन में दी गई है। आम तौर पर, एप्लीकेशन के समय ओरिजिनल सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट की स्कैन की हुई कॉपी (PDF/JPEG) अपलोड करनी होती है।
RTPS एक्ट के तहत ज़्यादातर सर्टिफ़िकेट सेवाएँ (जैसे निवास, जाति, आय, नॉन-क्रीमी लेयर (NCL), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), चरित्र प्रमाण-पत्र) मुफ़्त हैं या उनके लिए बहुत कम प्रोसेसिंग फ़ीस लगती है; तत्काल (तेज़ी से काम होने वाली) रिक्वेस्ट और पर्यटन विभाग की कुछ सेवाओं के लिए तय फ़ीस लगती है। फ़ीस की जानकारी के लिए सेवा से जुड़े FAQ देखें।
यह मंज़ूरी यह पक्का करती है कि कंस्ट्रक्शन शुरू होने से पहले, फ़ैक्टरी का प्रस्तावित लेआउट सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्ट्रक्चर और पर्यावरण से जुड़े कानूनी नियमों का पालन करता हो।
नहीं। छोटी-मोटी मरम्मत के लिए मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं हो सकती है, जबकि निर्माण, संरचना में बदलाव, विस्तार या फ़ैक्टरी के लेआउट में बदलाव के लिए आम तौर पर पहले से मंज़ूरी लेनी पड़ती है।
नहीं। मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू करने से पहले फैक्ट्री को सभी कानूनी मंज़ूरियाँ लेनी होंगी, जिनमें लाइसेंस और ऑक्यूपेंसी से जुड़ी अनुमतियाँ शामिल हैं।
हाँ। फ़ैक्टरी के कामकाज पर असर डालने वाले किसी भी बड़े विस्तार या बदलाव के लिए आम तौर पर पहले से मंज़ूरी लेनी पड़ती है।
हाँ। अगर बदले हुए प्रोसेस से फ़ैक्टरी के लेआउट, सुरक्षा उपायों, खतरनाक कामों या बिल्डिंग के डिज़ाइन पर असर पड़ता है, तो नई मंज़ूरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
नहीं। कंस्ट्रक्शन की मंज़ूरी और फ़ैक्ट्री लाइसेंस अलग-अलग कानूनी मंज़ूरियां हैं। एक मिलने का मतलब यह नहीं है कि दूसरी मंज़ूरी भी अपने-आप मिल जाएगी।
हाँ। जिन मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स के लिए लाइसेंस की ज़रूरत होती है, उन्हें केवल वैध लाइसेंस के साथ ही जारी रखा जाना चाहिए।
यह लागू नियमों और नवीनीकरण के किसी भी ऐसे प्रावधान पर निर्भर करता है, जो उपलब्ध हों।
हाँ। पिछली जाँचों, नियमों के उल्लंघन और नियमों के पालन से जुड़े रिकॉर्ड की जाँच की जा सकती है।
हाँ। मंज़ूरी मिलने पर, कर्मचारियों की मंज़ूरशुदा संख्या में बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
आम तौर पर, लाइसेंस के तहत शामिल किए जाने से पहले अतिरिक्त परिसरों के लिए अलग से मंज़ूरी या संशोधन की आवश्यकता होती है।
हाँ। सक्षम अधिकारी वैधानिक कल्याण और व्यावसायिक सुरक्षा सुविधाओं की जाँच कर सकते हैं।
हाँ। कर्मचारियों की सेहत और सुरक्षा पर असर डालने वाली गंभीर कमियों के कारण रिन्यूअल से इनकार किया जा सकता है।
नहीं। ऐसे मामलों में, अगर लागू हो, तो संस्थान को लाइसेंस बंद करने या सरेंडर करने के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
हाँ। आम तौर पर, लाइसेंस नंबर वही रहता है और उसकी वैधता की अवधि बढ़ा दी जाती है।
जी हाँ। प्राधिकरण कानून में परिवर्तन, निरीक्षण या परिचालन परिस्थितियों के आधार पर संशोधित शर्तें लागू कर सकता है।
लागू श्रम कानूनों के तहत आने वाले बीड़ी या सिगार बनाने वाले प्रतिष्ठानों को इस लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
काम की खास प्रकृति और कर्मचारियों की सेहत, सुरक्षा और भलाई की रक्षा करने की ज़रूरत की वजह से इन संस्थानों को रेगुलेट किया जाता है।
हाँ, जहाँ गतिविधि लागू कानून और नियमों के तहत निर्धारित दायरे में आती है।
हाँ। लाइसेंस में कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या और कामकाज की शर्तों का उल्लेख हो सकता है।
हाँ। OSH कोड और संबंधित नियमों के तहत बताए गए कल्याणकारी उपाय उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
नहीं। जिन मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के लिए लाइसेंस की ज़रूरत होती है, उन्हें ज़रूरी मंज़ूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जाना चाहिए।
नहीं। मालिकाना हक में बदलाव के लिए आम तौर पर तय ट्रांसफर प्रक्रिया के ज़रिए मंज़ूरी की ज़रूरत होती है।
नहीं। आम तौर पर हर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अलग लाइसेंस की ज़रूरत होती है।
हाँ। कर्मचारियों की सुरक्षा, हवा-पानी की व्यवस्था, साफ़-सफ़ाई या कल्याण से जुड़ी अतिरिक्त शर्तें लगाई जा सकती हैं।
हाँ। लागू प्रावधानों के अनुसार, श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन के कारण लाइसेंस को निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
नवीनीकरण यह सुनिश्चित करता है कि लाइसेंस की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद भी कॉन्ट्रैक्ट लेबर रखने की अनुमति बनी रहे।
एक्सपायरी के बाद रिन्यूअल लागू नियमों के प्रावधानों के अधीन है और इसके लिए अतिरिक्त अनुपालन या नए लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है।
हाँ, मंज़ूरी और लागू फ़ीस के भुगतान के अधीन, यदि नियमों के तहत इसकी अनुमति हो।
सक्षम प्राधिकारी जोखिम मूल्यांकन या पूर्व अनुपालन इतिहास के आधार पर निरीक्षण कर सकता है।
हाँ। रिन्यूअल एप्लीकेशन पर फ़ैसला करते समय लंबित उल्लंघनों या मुकदमों पर विचार किया जा सकता है।
नवीनीकृत वैधता का निर्धारण लागू कानूनी प्रावधानों और स्वीकृत लाइसेंस अवधि के अनुसार किया जाता है।
कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की बदली हुई संख्या के आधार पर सिक्योरिटी डिपॉज़िट में बदलाव या संशोधन की ज़रूरत पड़ सकती है।
नहीं। जब तक मुख्य नियोक्ता का प्रतिष्ठान वैध रूप से पंजीकृत नहीं रहता, तब तक नवीनीकरण नहीं दिया जा सकता।
नहीं। जब तक कोई और सूचना न दी जाए, मौजूदा लाइसेंस अपडेट की गई वैलिडिटी अवधि के साथ मान्य रहेगा।
हाँ। अगर कानूनी शर्तें पूरी नहीं की जाती हैं या गंभीर उल्लंघन बिना सुलझाए रह जाते हैं, तो रिन्यूअल से इनकार किया जा सकता है।
यह एक संयुक्त वार्षिक वैधानिक रिटर्न है, जिसमें OSH कोड, 2020 के तहत रोज़गार, काम की स्थितियों, व्यावसायिक सुरक्षा, अनुबंध पर रखे गए श्रमिकों, कल्याणकारी उपायों और नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी शामिल होती है।
यह कई रिटर्न की जगह एक ही सालाना रिटर्न की व्यवस्था करके लेबर लॉ के नियमों का पालन करना आसान बनाता है, जहाँ भी यह लागू होता है।
इसमें एक पूरे वित्तीय वर्ष या लागू नियमों के तहत सरकार द्वारा निर्धारित रिपोर्टिंग अवधि से संबंधित जानकारी शामिल होती है।
हाँ। अगर किसी संस्थान को सालाना रिटर्न दाखिल करना ज़रूरी है, तो उसे रिटर्न जमा करना ही होगा, भले ही कोई खास बदलाव न हुआ हो, सिवाय तब जब लागू नियमों के तहत उसे छूट मिली हो।
हाँ। जहाँ अनुमति हो, वहाँ कानूनी प्रावधानों के अधीन, रिपोर्टिंग अवधि के दौरान बिना किसी रिपोर्ट करने योग्य गतिविधि वाले संस्थान 'NIL' रिटर्न जमा कर सकते हैं।
संस्थान की प्रोफ़ाइल, कर्मचारियों की संख्या, लिंग के आधार पर रोज़गार, कॉन्ट्रैक्ट लेबर, प्रवासी मज़दूर, काम के घंटे, कल्याणकारी सुविधाएँ, दुर्घटनाएँ, खतरनाक प्रक्रियाएँ (जहाँ लागू हो) और नियमों के तहत ज़रूरी अन्य अनुपालन संबंधी जानकारी।
हाँ। OSH कोड के तहत जहाँ भी लागू हो, वहाँ अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी जानकारी की आवश्यकता हो सकती है।
हाँ। अगर रिपोर्टिंग फ़ॉर्मेट में ज़रूरी हो, तो ओवरटाइम काम से जुड़ी जानकारी की ज़रूरत पड़ सकती है।
तय सालाना रिटर्न जमा न करना OSH कोड के तहत नियमों का पालन न करने जैसा हो सकता है और लागू कानून के अनुसार कार्रवाई का कारण बन सकता है।
इस जानकारी का इस्तेमाल OSH कोड के तहत नियमों का पालन सुनिश्चित करने, लेबर से जुड़े आँकड़े जुटाने, नीतियाँ बनाने, निरीक्षण करने, कर्मचारियों के कल्याण की योजना बनाने और नियमों के पालन की निगरानी करने के लिए किया जाता है।
'शुरुआत' (Commencement) का मतलब उस तारीख से है जब कोई संस्थान ज़रूरी रजिस्ट्रेशन और मंज़ूरी मिलने के बाद असल में अपना कमर्शियल, इंडस्ट्रियल, मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस का काम शुरू करता है।
'सेसेशन' (Cessation) का मतलब है किसी संस्थान के बिज़नेस कामकाज का हमेशा के लिए बंद होना, रुक जाना, खत्म हो जाना या समाप्त हो जाना।
यह नोटिस श्रम विभाग को इस बात का अपडेटेड रिकॉर्ड रखने में मदद करता है कि कोई संस्थान चालू है या स्थायी रूप से बंद हो गया है।
हाँ। रजिस्ट्रेशन कानून के तहत किसी संस्थान की पहचान करता है, जबकि कामकाज शुरू होने की सूचना अथॉरिटी को यह बताती है कि असल में बिज़नेस गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं।
नहीं। रखरखाव, मौसमी कामकाज, हड़ताल या मरम्मत की वजह से अस्थायी रूप से बंद होने को आम तौर पर स्थायी रूप से बंद होना नहीं माना जाता, जब तक कि लागू कानून के तहत ऐसा घोषित न किया गया हो।
हाँ। अगर कामकाज फिर से शुरू होता है, तो काम शुरू करने से पहले एम्प्लॉयर को विभाग को सूचित करना पड़ सकता है और लागू कानूनी ज़रूरतों का पालन करना पड़ सकता है।
हाँ। अगर जानकारी गलत, अधूरी, बिना सबूत के या डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है, तो नोटिस को रिजेक्ट किया जा सकता है।
यह विभागीय डिजिटल सिस्टम में पहले से रजिस्टर्ड बॉयलर का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने या उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है।
डिजिटाइज़ेशन से रिकॉर्ड मैनेजमेंट बेहतर होता है, ऑनलाइन सेवाएँ संभव होती हैं, पारदर्शिता बढ़ती है और भविष्य में होने वाले निरीक्षणों व नियमों के पालन की निगरानी आसान हो जाती है।
हाँ। पुराने कागज़ी रिकॉर्ड वाले मौजूदा बॉयलर्स को डिजिटल डेटाबेस पर माइग्रेट करने की ज़रूरत पड़ सकती है।
नहीं। रिकॉर्ड्स को डिजिटल फ़ॉर्मैट में बदलते समय आम तौर पर ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन नंबर ही रखा जाता है।
रजिस्ट्रेशन की जानकारी, मालिकाना हक के रिकॉर्ड, इंस्पेक्शन और मरम्मत का इतिहास, सर्टिफ़िकेट, मंज़ूर किया गया वर्किंग प्रेशर और तकनीकी जानकारी को डिजिटाइज़ किया जा सकता है।
सही दस्तावेज़ी सबूत होने और सक्षम अधिकारी द्वारा मंज़ूरी मिलने पर सुधार की अनुमति दी जा सकती है।
हाँ। डिजिटल रिकॉर्ड्स से इंस्पेक्शन की ड्यू डेट्स और कंप्लायंस हिस्ट्री को ऑटोमैटिक तरीके से ट्रैक करना संभव हो जाता है।
नहीं। डिजिटाइज़ेशन एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और यह बॉयलर्स एक्ट के तहत मालिक की कानूनी ज़िम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं करती है।
इस कैटेगरी में बॉयलर से जुड़ी अलग-अलग तरह की सर्विस शामिल हैं, जैसे डुप्लीकेट सर्टिफिकेट, बदलाव, खास जांच, मंज़ूरी, एंडोर्समेंट और ऐसी दूसरी नोटिफ़ाई की गई सर्विस जो रजिस्ट्रेशन या रिन्यूअल से अलग हैं।
हाँ। बॉयलर में मंज़ूर किए गए बदलावों की तकनीकी जाँच और मंज़ूरी के लिए तय फ़ीस का भुगतान करना पड़ सकता है।
हाँ। खो जाने या खराब हो जाने के कारण डुप्लिकेट सर्टिफ़िकेट के लिए किए गए अनुरोध इस श्रेणी में आ सकते हैं, बशर्ते उनकी पुष्टि हो जाए।
जहाँ ज़रूरी हो, कमियों को ठीक करने के बाद दोबारा निरीक्षण के लिए अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
हाँ। बॉयलर के प्रकार, क्षमता, प्रेशर रेटिंग या मांगी गई सर्विस की प्रकृति के आधार पर कुछ फीस अलग-अलग हो सकती हैं।
रिफंड की सुविधा लागू वित्तीय नियमों और विभागीय प्रावधानों के अधीन है।
नहीं। पेमेंट में रिक्वेस्ट की प्रोसेसिंग शामिल है, लेकिन इससे मंज़ूरी की गारंटी नहीं मिलती।
हाँ। आवेदक कई योग्य सेवाओं के लिए अनुरोध कर सकते हैं, और हर सेवा के लिए तय शुल्क का भुगतान करना होगा।
फीस बॉयलर्स एक्ट और लागू राज्य नियमों के तहत अधिसूचित शेड्यूल के अनुसार तय की जाती है।
रिन्यूअल इंस्पेक्शन में पहले से रजिस्टर्ड बॉयलर के शुरुआती इंस्टॉलेशन के बजाय, उसके सुरक्षित रूप से काम करते रहने की स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है।
हाँ। अगर बॉयलर तय सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करता है, तो रिन्यूअल रोका जा सकता है।
हाँ। पिछली जाँच के बाद की गई मरम्मत की जाँच यह पक्का करने के लिए की जाती है कि वे मंज़ूर किए गए तरीकों के अनुसार हैं।
हाँ। जहाँ इंस्पेक्टर बॉयलर की मज़बूती का आकलन करने के लिए NDT तरीकों को ज़रूरी समझते हैं, वहाँ इनकी ज़रूरत पड़ सकती है।
हाँ। आम तौर पर, अंदर की सतहों की ठीक से जाँच करने के लिए बॉयलर को साफ़ और तैयार करना ज़रूरी होता है।
नहीं। रिन्यूअल से इंस्पेक्शन के समय नियमों का पालन होने की पुष्टि होती है; लगातार सुरक्षित तरीके से काम चलाना मालिक और ऑपरेटर की ज़िम्मेदारी है।
इंस्पेक्शन से यह पुष्टि होती है कि बॉयलर को चालू करने से पहले, उसे बॉयलर एक्ट और लागू नियमों की ज़रूरतों के अनुसार बनाया, लगाया और टेस्ट किया गया है।
नहीं। जिस बॉयलर के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, उसे तब तक नहीं चलाया जाना चाहिए जब तक कि सक्षम अधिकारी द्वारा उसका निरीक्षण, रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन न कर लिया जाए।
इस जांच में बॉयलर की बनावट, प्रेशर वाले हिस्सों, माउंटिंग, सुरक्षा उपकरणों, इंस्टॉलेशन की क्वालिटी, वेल्डिंग और उससे जुड़े टेक्निकल डॉक्यूमेंट्स की जांच शामिल है।
हाँ। रजिस्ट्रेशन से पहले बॉयलर की संरचनात्मक मजबूती की जाँच करने के लिए आमतौर पर हाइड्रोलिक प्रेशर टेस्टिंग की ज़रूरत होती है।
हाँ। सेफ्टी वाल्व, प्रेशर गेज, वॉटर लेवल इंडिकेटर, फ़ीड अरेंजमेंट और अन्य ज़रूरी माउंटिंग की जाँच की जाती है।
हाँ। इंस्पेक्टर मंज़ूर किए गए वर्किंग प्रेशर की जाँच करता है और यह पक्का करता है कि वह डिज़ाइन की ज़रूरतों और कानूनी मानकों के अनुसार हो।
हाँ। बॉयलर या उसके प्रेशर वाले हिस्सों में बिना अनुमति के बदलाव करने पर तकनीकी समीक्षा की ज़रूरत पड़ सकती है और इससे रजिस्ट्रेशन में देरी हो सकती है।
संतोषजनक जांच और मंज़ूरी के बाद, बॉयलर को एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाता है और कानूनी शर्तों के अधीन इसे चलाने की अनुमति देने वाला सर्टिफ़िकेट जारी किया जाता है।
समय-समय पर होने वाली जांच यह सुनिश्चित करती है कि बॉयलर संचालन के लिए सुरक्षित रहे और कानूनी सुरक्षा मानकों का पालन करे।
नहीं। लागू कानूनी प्रावधानों के तहत अनुमति होने के अलावा, बॉयलर को निरीक्षण की निर्धारित वैधता अवधि से अधिक समय तक नहीं चलाया जाना चाहिए।
इस जांच में प्रेशर पार्ट्स, सेफ्टी वाल्व, माउंटिंग, गेज, स्ट्रक्चरल स्थिति, ऑपरेशनल सेफ्टी और कानूनी नियमों का पालन शामिल है।
नहीं। बॉयलर के प्रकार, काम करने की स्थितियों, उम्र और लागू नियमों के आधार पर निरीक्षण के अंतराल अलग-अलग होते हैं।
सक्षम अधिकारी की मंज़ूरी और कानूनी समय-सीमाओं का पालन करने पर निरीक्षण का समय बदला जा सकता है।
बड़ी मरम्मत के बाद बॉयलर को दोबारा इस्तेमाल में लाने से पहले आम तौर पर उसका निरीक्षण और मंज़ूरी ज़रूरी होती है।
हाँ। सेफ्टी वॉल्व, प्रेशर गेज, फ़ीड सिस्टम और सुरक्षा से जुड़े अन्य ज़रूरी उपकरणों की ज़रूरत के अनुसार जाँच और टेस्टिंग की जाती है।
हाँ। बॉयलर को सुरक्षित रूप से चलाने के लिए इंस्पेक्टर शर्तें या संचालन की सीमाएँ तय कर सकता है।
यह सोशल सिक्योरिटी अनुपालन, कर्मचारी कवरेज और कानूनी दायित्वों से जुड़ी एकीकृत जानकारी प्रदान करता है।
हाँ। लागू योजनाओं के तहत कर्मचारियों के कवरेज से संबंधित जानकारी की आवश्यकता हो सकती है।
हाँ। कर्मचारियों की जानकारी तय रिपोर्टिंग फ़ॉर्मैट के अनुसार दी जानी चाहिए।
जहाँ भी लागू हो, वहाँ कानूनी योगदान से संबंधित संक्षिप्त जानकारी की आवश्यकता हो सकती है।
अगर लागू सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों और सरकारी नोटिफ़िकेशन के तहत ज़रूरी हो, तो ऐसी जानकारी की आवश्यकता हो सकती है।
हाँ। तय किए गए रोज़गार के आँकड़ों में रिपोर्टिंग की अवधि के दौरान कर्मचारियों की आवाजाही सही-सही दिखनी चाहिए।
हाँ। सक्षम अधिकारी कानूनी योगदान के रिकॉर्ड और निरीक्षणों के आधार पर रिटर्न की क्रॉस-चेक कर सकते हैं।
नहीं। अन्य कानूनी रिटर्न तब तक लागू रहेंगे जब तक कि उन्हें कानून द्वारा विशेष रूप से एक साथ न मिला दिया जाए।
यह ट्रेड यूनियनों को सदस्यता, वित्त, पदाधिकारियों और कानूनी अनुपालन के बारे में वार्षिक जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम बनाता है।
इस रिटर्न में कुल सदस्यता, नए सदस्य बनने, इस्तीफ़ा देने, हटाए जाने और रिपोर्टिंग की तारीख़ पर सदस्यता की जानकारी शामिल है।
हाँ। तय की गई वित्तीय जानकारी, जिसमें प्राप्तियाँ, खर्च, संपत्ति और देनदारियाँ शामिल हैं, की ज़रूरत पड़ सकती है।
हाँ, जहाँ भी लागू प्रावधानों के तहत खातों का ऑडिट ज़रूरी है।
संशोधन लागू नियमों के तहत होता है और इसके लिए मंज़ूरी या सही किया हुआ रिटर्न जमा करने की ज़रूरत पड़ सकती है।
हाँ। रजिस्ट्रार, ट्रेड यूनियन द्वारा रखे गए सहायक रिकॉर्ड से जमा की गई जानकारी की जाँच कर सकते हैं।
यह रजिस्ट्रार द्वारा रखा जाने वाला आधिकारिक रजिस्टर है, जिसमें सभी रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियनों और बाद में मंज़ूर किए गए संशोधनों का विवरण होता है।
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के तहत ट्रेड यूनियन के नाम, रजिस्टर्ड ऑफिस, संविधान, उद्देश्यों, पदाधिकारियों या अन्य विवरणों से जुड़े संशोधन।
नहीं। संशोधन तभी प्रभावी होते हैं जब उन्हें रजिस्ट्रार द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है और कानून द्वारा आवश्यक होने पर दर्ज कर लिया जाता है।
हाँ, कानूनी ज़रूरतों का पालन करने और रजिस्ट्रार द्वारा संशोधन को मंज़ूरी मिलने पर।
हाँ, नाम बदला जा सकता है, बशर्ते प्रस्तावित नाम कानूनी ज़रूरतों को पूरा करता हो और पहले से रजिस्टर्ड किसी ट्रेड यूनियन के नाम से न टकराता हो।
नहीं। संविधान में ऐसे संशोधन जिनके लिए कानूनी मंज़ूरी की ज़रूरत होती है, उन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए रिपोर्ट करना ज़रूरी है।
नहीं। जब तक कानून में कोई और प्रावधान न हो, ट्रेड यूनियन का मूल रजिस्ट्रेशन नंबर वही रहता है।
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 के तहत, रजिस्ट्रेशन से श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली ट्रेड यूनियन को कानूनी मान्यता मिलती है।
हाँ, लागू कानून के तहत बताई गई पात्रता और सदस्यता की शर्तों के अधीन।
नहीं। रजिस्ट्रेशन और मान्यता अलग-अलग कानूनी अवधारणाएँ हैं जो लागू प्रावधानों के तहत आती हैं।
हाँ। कानूनी ज़रूरतों को पूरा करने पर कई ट्रेड यूनियनों का रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड और ट्रेड यूनियन के संविधान के प्रावधानों के अधीन, पात्र कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व किया जा सकता है।
पदाधिकारियों की पात्रता 'इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड' और लागू नियमों के प्रावधानों के तहत तय होती है।
अथॉरिटी सदस्यता की शर्तों, संविधान/उप-नियमों, पदाधिकारियों, उद्देश्यों और कानूनी प्रावधानों के पालन की जाँच करती है।
हाँ। अगर प्रस्तावित नाम किसी पहले से रजिस्टर्ड ट्रेड यूनियन के नाम से बहुत मिलता-जुलता हो या कानूनी ज़रूरतों का उल्लंघन करता हो, तो उसे अस्वीकार किया जा सकता है।
नहीं। हड़ताल जैसी औद्योगिक कार्रवाइयों को 'इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड' और अन्य लागू कानूनों के प्रावधानों का पालन करना होगा।
जब फ़ैक्ट्री की ओनरशिप, मैनेजमेंट या कानूनी कंट्रोल बदलता है, तो ट्रांसफ़र की ज़रूरत होती है।
हाँ। कानूनी रूप से मान्य मालिकाना हक ट्रांसफर के दस्तावेज़ जमा करने और विभागीय मंज़ूरी मिलने के बाद ट्रांसफर की अनुमति दी जा सकती है।
हाँ। कानूनी मालिकाना हक के ढांचे में बदलाव के लिए आम तौर पर लाइसेंस ट्रांसफर या दूसरी तय प्रक्रियाओं की ज़रूरत होती है।
नहीं। लाइसेंस की मौजूदा शर्तें आम तौर पर तब तक लागू रहती हैं, जब तक कि सक्षम अधिकारी उनमें कोई बदलाव न करे।
नहीं। आम तौर पर आंशिक ट्रांसफर की अनुमति नहीं है, जब तक कि लागू नियमों के तहत विशेष रूप से ऐसा प्रावधान न हो।
अगर ज़रूरी समझा जाए, तो सक्षम अधिकारी ट्रांसफ़र को मंज़ूरी देने से पहले फ़ैक्टरी का निरीक्षण कर सकते हैं।
नहीं। जिन अन्य कानूनी रिकॉर्ड में संशोधन की आवश्यकता है, उन्हें भी निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से अपडेट किया जाना चाहिए।
फ़ैक्टरी के नाम, कब्ज़ा रखने वाले व्यक्ति (ऑक्यूपायर), मैनेजर, लगी हुई बिजली क्षमता, कर्मचारियों की संख्या, मैन्युफ़ैक्चरिंग प्रोसेस या फ़ैक्टरी के लेआउट में बदलाव के लिए आम तौर पर संशोधन की ज़रूरत होती है।
हाँ। नियुक्त फ़ैक्टरी मैनेजर में बदलाव की सूचना तय संशोधन प्रक्रिया के ज़रिए दी जानी चाहिए।
हाँ। खतरनाक प्रक्रियाओं से जुड़े बदलावों के लिए उचित मंज़ूरी और कानूनी प्रावधानों का पालन ज़रूरी है।
अगर बढ़े हुए लोड का असर लाइसेंस वाली क्षमता या कानूनी मंज़ूरी पर पड़ता है, तो संशोधन की ज़रूरत पड़ सकती है।
हाँ, पात्रता, सहायक दस्तावेज़ों और सक्षम प्राधिकारी की मंज़ूरी के अधीन।
हाँ। अगर विस्तार से मंज़ूर किए गए बिल्डिंग प्लान, प्रोडक्शन क्षमता या कर्मचारियों की संख्या पर असर पड़ता है, तो आम तौर पर उसमें बदलाव करने की ज़रूरत होती है।
हाँ। डिपार्टमेंट की मंज़ूरी मिलने पर, एक ही संशोधन अनुरोध में कई संबंधित बदलावों पर विचार किया जा सकता है।
नहीं। संशोधन आम तौर पर लाइसेंस की वैधता अवधि को बढ़ाए बिना उसके विवरण को अपडेट करता है।
यह LRD की नागरिकों और संस्थानों से जुड़ी सेवाओं का एक सेट है — जिसमें प्रवासी मज़दूर कल्याण अनुदान और श्रम से जुड़े आठ कानूनों के तहत लाइसेंसिंग/रजिस्ट्रेशन शामिल हैं — जो GAD, गृह और पर्यटन विभागों की सेवाओं के साथ-साथ 'बिहार-वन इंटीग्रेटेड सिटिज़न सर्विसेज़ प्लेटफ़ॉर्म' के ज़रिए उपलब्ध कराई गई हैं।
नए लेबर कोड के अनुसार, कुल 31 LRD सेवाएं हैं (OSH कोड, 2020 – 14 सेवाएं, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड – 3 सेवाएं, सोशल सिक्योरिटी कोड – 2 सेवाएं, बॉयलर्स एक्ट सेवाएं – 5 सेवाएं, बिहार शताब्दी योजना, 2024 – 5 सेवाएं, RTPS एक्ट – लेबर वेलफेयर सेवाएं – 2 सेवाएं)।
अलग-अलग सेवाओं के लिए आवेदक भी अलग-अलग होते हैं — इनमें व्यक्तिगत प्रवासी मज़दूर/उनके आश्रित (कल्याणकारी अनुदान के लिए) और प्रतिष्ठान के मालिक, कब्ज़ा करने वाले, मुख्य नियोक्ता या भर्ती करने वाले एजेंट (लाइसेंसिंग/पंजीकरण सेवाओं के लिए) शामिल हैं।
अपनी 'बिहार पहचान ID' का इस्तेमाल करके 'बिहार-वन' (BiharOne) सिटिज़न पोर्टल पर लॉग इन करें, ज़रूरी LRD सर्विस चुनें, ऑनलाइन एप्लीकेशन फ़ॉर्म भरें, तय दस्तावेज़ अपलोड करें, लागू फ़ीस का भुगतान करें और सबमिट करें। ट्रैकिंग के लिए एक एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (ARN) जेनरेट होता है।
ARN एक खास ट्रैकिंग नंबर है जो BiharOne पर जमा किए गए हर आवेदन के लिए बनाया जाता है। इसका इस्तेमाल स्टेटस ट्रैक करने, प्रोसेसिंग ऑफिसर के सवालों का जवाब देने और फ़ाइनल सर्टिफ़िकेट/लाइसेंस/ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए किया जाता है।
BiharOne पोर्टल पर 'Track Application Status' विकल्प का इस्तेमाल करें और अपना ARN डालें, या हर वर्कफ़्लो स्टेज पर भेजे जाने वाले SMS/ईमेल नोटिफ़िकेशन के ज़रिए स्टेटस अपडेट देखें।
आवेदन जमा करते समय इंटीग्रेटेड पेमेंट गेटवे (OGRAS 2.0) के ज़रिए ऑनलाइन फ़ीस का भुगतान किया जाता है; हर सफल भुगतान के लिए एक रसीद/चालान ID (GRN) जनरेट होती है।
आपको कारण बताते हुए एक नोटिफ़िकेशन मिलेगा। सुधार के लिए लौटाई गई एप्लीकेशन को मांगी गई जानकारी के साथ फिर से जमा किया जा सकता है। तय SLA से ज़्यादा देरी वाली एप्लीकेशन के मामले को 'पब्लिक ग्रीवेंस मैनेजमेंट सिस्टम' (PGMS) या डिपार्टमेंट के एस्केलेशन मैट्रिक्स के ज़रिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
बिहारवन पब्लिक ग्रीवेंस मैनेजमेंट सिस्टम (PGMS) के तहत सात रजिस्ट्रेशन चैनलों (पोर्टल, कॉल सेंटर, मोबाइल ऐप, वगैरह) में से किसी का भी इस्तेमाल करके शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। इन शिकायतों को SLA और एस्केलेशन मैट्रिक्स के अनुसार संबंधित श्रम संसाधन विभाग के अधिकारी के पास भेजा जाता है।
नहीं। इस दस्तावेज़ में दी गई सभी फ़ीस, SLA, वैलिडिटी और दस्तावेज़ों की जानकारी सिर्फ़ उदाहरण के तौर पर है। इनकी पुष्टि संबंधित एक्ट, उसके बिहार नियमों और लेबर रिसोर्स डिपार्टमेंट के मौजूदा नोटिफ़िकेशन के आधार पर की जानी बाकी है। यह तरीका बिहार-वन (BiharOne) की दूसरी सेवाओं के दस्तावेज़ों के लिए अपनाए गए तरीके के अनुरूप ही है।
यह एक ऑनलाइन सेवा है जो OSH कोड, 2020 के लागू होने से पहले से चल रहे संस्थानों के मालिकों को लेबर रिसोर्स डिपार्टमेंट के पास अपने संस्थान का रजिस्ट्रेशन कराने और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने की सुविधा देती है।
OSH कोड, 2020 और लागू राज्य नियमों के दायरे में आने वाले संस्थान को चलाने वाले हर नियोक्ता के लिए संस्थान का रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है, जब तक कि कानून के तहत उसे छूट न मिली हो।
एक ऐसा संस्थान जो OSH कोड, 2020 के तहत रजिस्ट्रेशन के प्रावधान लागू होने से पहले ही चल रहा था।
रजिस्ट्रेशन से संस्थान का आधिकारिक रिकॉर्ड बनता है, नियमों के पालन की निगरानी संभव होती है, मज़दूर कल्याण के उपायों को लागू करने में आसानी होती है और श्रम विभाग के तहत कानूनी मान्यता मिलती है।
हाँ। OSH कोड के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, बशर्ते वे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा तय किए गए लागू होने के नियमों को पूरा करते हों।
हाँ। आवेदन को निर्धारित ऑनलाइन आवेदन फ़ॉर्म का उपयोग करके 'बिहार वन पोर्टल' के माध्यम से जमा किया जा सकता है।
नियोक्ता, कब्ज़ा रखने वाला, मालिक, कंपनी का डायरेक्टर, मैनेजिंग पार्टनर, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, या वैध अधिकार-पत्र के ज़रिए अधिकृत कोई भी व्यक्ति।
आम तौर पर ज़रूरी डॉक्युमेंट्स में एम्प्लॉयर/अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता का PAN और आधार, एस्टैब्लिशमेंट का सबूत, पते का सबूत, पहचान का सबूत, इनकॉर्पोरेशन के डॉक्युमेंट्स (अगर लागू हो), GST रजिस्ट्रेशन (अगर लागू हो) और डिपार्टमेंट द्वारा बताए गए अन्य डॉक्युमेंट्स शामिल हैं।
पहचान की पुष्टि के लिए आधार की ज़रूरत हो सकती है और लागू सरकारी दिशानिर्देशों के तहत अनुमति होने पर संबंधित सहमति ली जाएगी। आवेदकों को विभाग के नवीनतम निर्देशों का पालन करना चाहिए।
अगर लागू हो, तो तय फ़ीस का भुगतान लेबर रिसोर्स डिपार्टमेंट की सूचना के अनुसार करना होगा। आवेदकों को पोर्टल पर उपलब्ध फ़ीस की ताज़ा जानकारी देखनी चाहिए।
जमा की गई जानकारी और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर, श्रम संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदनों पर कार्रवाई की जाती है।
आवेदक अपने क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल करके पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं और एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (ARN) का इस्तेमाल करके एप्लीकेशन को ट्रैक कर सकते हैं।
विभाग सुधार के लिए आवेदन वापस कर सकता है या अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है। आवेदक को तय समय के भीतर जवाब देना चाहिए।
नहीं। आम तौर पर, हर प्रतिष्ठान के लिए अलग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन जमा करना ज़रूरी है, जब तक कि लागू नियमों के तहत इसकी अनुमति न हो।
हाँ। सक्षम अधिकारी OSH कोड, 2020 और लागू नियमों के प्रावधानों के अनुसार निरीक्षण कर सकते हैं या सत्यापन करवा सकते हैं।
यह लेबर रिसोर्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी किया गया आधिकारिक सर्टिफ़िकेट है, जो OSH कोड के तहत संस्थान के रजिस्ट्रेशन की पुष्टि करता है।
मंजूरी मिलने के बाद, मंज़ूर किया गया सर्टिफ़िकेट BiharOne पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है।
हाँ। ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए जारी किए गए सर्टिफ़िकेट सरकारी गाइडलाइंस के अनुसार डिजिटल रूप से साइन किए जा सकते हैं या इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित किए जा सकते हैं।
एम्प्लॉयर को 'सर्टिफिकेट ऑफ़ रजिस्ट्रेशन में संशोधन' (Amendment to Certificate of Registration) की तय सर्विस के ज़रिए रजिस्ट्रेशन में संशोधन के लिए अप्लाई करना चाहिए।
अगर कोई संस्थान अपना कामकाज बंद कर देता है, गलत जानकारी देता है या कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो OSH कोड के प्रावधानों के अनुसार उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।
गलत जानकारी, अधूरा आवेदन, अपलोड किए गए दस्तावेज़ों में मेल न खाना, अमान्य ऑथराइज़ेशन, अयोग्य संस्थान, डुप्लिकेट रजिस्ट्रेशन, या कानूनी ज़रूरतों का पालन न करना।
आवेदक कमियों को ठीक करके नया आवेदन जमा कर सकता है या लागू नियमों के तहत उपलब्ध अपील/उपाय का लाभ उठा सकता है, यदि कोई हो।
हाँ। एक अधिकृत प्रतिनिधि नियोक्ता की ओर से आवेदन जमा कर सकता है, बशर्ते कि एक वैध प्राधिकरण दस्तावेज़ जमा किया जाए।
रजिस्ट्रेशन की वैधता OSH कोड, 2020 और राज्य के नियमों के लागू प्रावधानों के अनुसार तय होगी।
नहीं। रजिस्ट्रेशन आम तौर पर किसी खास एस्टैब्लिशमेंट (संस्थान) के लिए होता है। अगर किसी ट्रांसफर के लिए ओनरशिप या लाइसेंस में बदलाव की ज़रूरत हो, तो उसे सही सर्विस के ज़रिए प्रोसेस किया जाना चाहिए, जहाँ भी यह लागू हो।
आवेदक तकनीकी या सेवा-संबंधी सहायता के लिए ज़िला श्रम कार्यालय, श्रम संसाधन विभाग के हेल्पडेस्क या बिहार-वन पोर्टल के हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं।
यह एक ऑनलाइन सर्विस है जो एम्प्लॉयर्स को OSH कोड, 2020 के तहत काम शुरू करने से पहले नई बनी वर्कप्लेस को रजिस्टर करने की सुविधा देती है, जहाँ भी कानून के तहत रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हो।
OSH कोड के तहत आने वाली कोई भी नई फ़ैक्ट्री, कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट, इंडस्ट्रियल यूनिट, संस्थान, ऑफ़िस, दुकान, वेयरहाउस, कंस्ट्रक्शन एस्टैब्लिशमेंट या कोई भी अन्य वर्कप्लेस शुरू करने वाले हर एम्प्लॉयर को आवेदन करना चाहिए।
कोई भी प्रतिष्ठान जो OSH कोड के तहत रजिस्ट्रेशन के प्रावधान लागू होने के बाद अपना कामकाज शुरू करता है और लागू नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत रखता है।
काम शुरू करने के लिए तय समय-सीमा से पहले या उसके भीतर, OSH कोड, 2020 और राज्य के नियमों के लागू प्रावधानों के तहत रजिस्ट्रेशन कराना ज़रूरी है।
हाँ। आवेदन तय ऑनलाइन फ़ॉर्म का इस्तेमाल करके 'बिहार वन पोर्टल' के ज़रिए जमा किए जाते हैं।
मालिक, नियोक्ता, कब्ज़ा रखने वाला, मैनेजिंग डायरेक्टर, पार्टनर, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, सरकारी विभाग, सोसाइटी, ट्रस्ट, LLP, या कोई भी अधिकृत प्रतिनिधि।
आवेदक के पास प्रतिष्ठान चलाने की कानूनी योग्यता होनी चाहिए और उसे लागू कानूनी ज़रूरतों का पालन करना चाहिए।
कानूनी प्रावधानों के तहत जहाँ भी लागू हो, वहाँ नियोक्ता या प्रतिष्ठान के PAN की आवश्यकता हो सकती है।
GST की जानकारी तभी ज़रूरी है, जब संस्थान GST के तहत रजिस्टर्ड हो या टैक्स कानूनों के तहत उस पर यह लागू होता हो।
संस्थान का नाम, नियोक्ता का विवरण, पता, स्वामित्व का प्रकार, शुरू होने की तारीख, व्यावसायिक गतिविधि, कर्मचारियों की संख्या, संपर्क जानकारी, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और अन्य कानूनी विवरण।
LIN एक खास पहचान नंबर है जो किसी संस्थान को लेबर लॉ (श्रम कानून) का पालन करने और लेबर से जुड़ी सेवाओं में एक जैसी पहचान के लिए दिया जाता है।
लागू होने वाली फीस, यदि कोई हो, वही होगी जो श्रम संसाधन विभाग द्वारा समय-समय पर अधिसूचित की जाएगी।
फीस का भुगतान नेट बैंकिंग, UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या पोर्टल पर उपलब्ध अन्य पेमेंट तरीकों से ऑनलाइन किया जा सकता है।
यह एक ऑनलाइन सर्विस है जो रजिस्टर्ड संस्थानों को OSH कोड, 2020 के तहत जारी उनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में मौजूद जानकारी को बदलने या अपडेट करने की सुविधा देती है।
रजिस्टर्ड एम्प्लॉयर, ऑक्युपायर, मालिक, कंपनी डायरेक्टर, मैनेजिंग पार्टनर, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता या अधिकृत प्रतिनिधि आवेदन कर सकते हैं।
जब भी किसी रजिस्टर्ड जानकारी में कोई बदलाव होता है, जैसे कि संस्थान का नाम, पता, नियोक्ता का विवरण, कारोबार का प्रकार, संपर्क विवरण या अन्य निर्धारित जानकारी।
हाँ। OSH कोड और राज्य के नियमों के लागू प्रावधानों के अनुसार, नियोक्ताओं को ज़रूरी बदलावों के बारे में श्रम संसाधन विभाग को तुरंत सूचित करना चाहिए।
संस्थान के नाम, पते, नियोक्ता के विवरण, मालिकाना हक के विवरण, संपर्क जानकारी, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, कर्मचारियों के विवरण, व्यावसायिक गतिविधि और अन्य स्वीकार्य विवरणों से संबंधित संशोधन।
जहाँ लागू हो, वहाँ मालिकाना हक से जुड़े बदलावों की अनुमति दी जा सकती है। जिन मामलों में कानून के तहत ट्रांसफर की ज़रूरत हो, वहाँ आवेदक को ट्रांसफर से जुड़ी सही सेवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
हाँ। आम तौर पर, वेरिफिकेशन के बाद इस सर्विस के ज़रिए कॉन्टैक्ट डिटेल्स अपडेट की जा सकती हैं।
हाँ। संशोधन की पूरी प्रक्रिया बिहार-वन (BiharOne) पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध है।
सरकारी दिशानिर्देशों के तहत जहाँ भी लागू हो, पहचान के सत्यापन के लिए आधार का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हाँ। आम तौर पर कई बदलाव एक साथ सबमिट किए जा सकते हैं, बशर्ते सभी ज़रूरी सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर दिए जाएँ।
नहीं। किसी संस्थान को दिया गया रजिस्ट्रेशन नंबर/LIN आम तौर पर बदला नहीं जा सकता।
दस्तावेज़ों के सत्यापन के अधीन, लेबर रिसोर्स डिपार्टमेंट द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदनों पर कार्रवाई की जाती है।
आवेदकों को पोर्टल के ज़रिए अपडेट मिलते हैं और सुविधा चालू होने पर उन्हें SMS/ईमेल नोटिफ़िकेशन भी मिल सकते हैं।
हाँ। पोर्टल के ज़रिए जारी किया गया सर्टिफ़िकेट सक्षम अधिकारी द्वारा डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित या इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित होता है।
पोर्टल की कार्यक्षमता और विभागीय प्रावधानों के अधीन, मंज़ूरी से पहले निकासी की अनुमति दी जा सकती है।
एक बार संशोधन को मंज़ूरी मिल जाने के बाद, संशोधित पंजीकरण प्रमाणपत्र पुराने प्रमाणपत्र की जगह ले लेता है।
हाँ। आवेदक पोर्टल पर एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (ARN) का इस्तेमाल करके एप्लीकेशन का स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।
हाँ। कोई अधिकृत सलाहकार या प्रतिनिधि, एक वैध प्राधिकरण पत्र के साथ नियोक्ता की ओर से आवेदन कर सकता है।
नहीं। मौजूदा संस्थानों को नया रजिस्ट्रेशन कराने के बजाय अमेंडमेंट सर्विस का इस्तेमाल करना चाहिए, जब तक कि कानून के तहत ऐसा करना ज़रूरी न हो।
आवेदक ज़िला श्रम कार्यालय, श्रम संसाधन विभाग के हेल्पडेस्क या बिहार-वन (BiharOne) तकनीकी सहायता से संपर्क कर सकते हैं।
आवास प्रमाण पत्र, बिहार में आवेदक के स्थायी या वर्तमान निवास का एक आधिकारिक प्रमाण है। इसकी ज़रूरत आमतौर पर शिक्षा में दाखिले, नौकरी, स्कॉलरशिप और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन करते समय पड़ती है।
बिहार का कोई भी निवासी, जिसे अधिवास/आवास के दस्तावेज़ी प्रमाण की आवश्यकता हो, वह अपने स्थानीय सर्कल (अंचल अधिकारी) कार्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकता है।
दोनों को अंचल अधिकारी (RO) लेवल पर प्रोसेस किया जाता है; तत्काल एक तेज़ तरीका है जिसमें काम जल्दी पूरा होता है और प्रोविज़नल सर्टिफ़िकेट 2 वर्किंग डेज़ में जारी कर दिया जाता है, जबकि जनरल कैटेगरी में स्टैंडर्ड RTPS एक्ट की समय-सीमा का पालन किया जाता है।
अंचल अधिकारी (RO) ही ओरिजिनल जारी करने वाली अथॉरिटी है। अगर अंचल अधिकारी (RO) लेवल पर RTPS एक्ट के SLA के तहत सर्टिफ़िकेट जारी नहीं किया जाता है, या अगर एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाती है, तो नागरिक अनुमंडल अधिकारी (SDO) के पास पहली अपील और उसके बाद जिला अधिकारी (DM) के पास दूसरी अपील कर सकता है।
पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड)
निवास/पते का प्रमाण (राशन कार्ड, वोटर ID, बिजली का बिल या ऐसा ही कोई दस्तावेज़)
स्व-घोषणा पत्र / शपथ-पत्र (जहाँ लागू हो)
पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
जनरल मोड आमतौर पर मुफ़्त होता है। सटीक राशि की पुष्टि मौजूदा RTPS एक्ट फ़ीस शेड्यूल के आधार पर की जानी चाहिए।
आमतौर पर निवास प्रमाण-पत्रों की कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं होती है, लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद नए दाखिले या स्कॉलरशिप जैसे कामों के लिए इस्तेमाल किए जाने पर इन्हें अक्सर फिर से मान्य या जारी किया जाता है; संबंधित अथॉरिटी (जैसे यूनिवर्सिटी या स्कीम) के वैधता नियमों की जांच कर लेनी चाहिए।
आपको पोर्टल या SMS के ज़रिए रिजेक्शन नोटिस का कारण बताया जाएगा। आप बताई गई कमी को ठीक करके दोबारा आवेदन कर सकते हैं या कानूनी अपील का रास्ता (अनुमंडल अधिकारी, फिर जिला अधिकारी) अपना सकते हैं।
चरित्र प्रमाण-पत्र एक आधिकारिक दस्तावेज़ है जो यह प्रमाणित करता है कि आवेदक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है; इसकी ज़रूरत आमतौर पर सरकारी नौकरी के आवेदन, पासपोर्ट सत्यापन, वीज़ा आवेदन और कुछ लाइसेंस/पंजीकरण प्रक्रियाओं के लिए होती है।
बिहार का कोई भी निवासी जिसे किसी खास मकसद (जैसे नौकरी, पासपोर्ट, लाइसेंस वगैरह) के लिए अच्छे आचरण/चरित्र के आधिकारिक प्रमाण-पत्र की ज़रूरत हो।
पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड)
निवास का प्रमाण
अनुरोध करने वाले अधिकारी (जैसे नियोक्ता, पासपोर्ट कार्यालय आदि) से उद्देश्य/आवश्यकता का पत्र, जहाँ लागू हो
पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
आमतौर पर, सर्टिफ़िकेट जारी करने से पहले वेरिफ़िकेशन के लिए आवेदन को उस स्थानीय पुलिस स्टेशन भेजा जाता है जिसके अधिकार क्षेत्र में आवेदक का निवास स्थान आता है; वहाँ पुलिस रिकॉर्ड की जाँच की जाती है।
चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया RTPS एक्ट के तहत तय SLA का पालन करती है, जिसमें पुलिस वेरिफिकेशन के लिए समय दिया जाता है; वर्किंग डेज़ की सही संख्या की पुष्टि होम डिपार्टमेंट के लिए मौजूदा RTPS एक्ट SLA नोटिफिकेशन से की जानी चाहिए।
RTPS एक्ट के तहत यह सेवा आम तौर पर मुफ़्त है या इसके लिए बहुत कम प्रोसेसिंग फ़ीस लगती है; कृपया मौजूदा फ़ीस शेड्यूल से इसकी पुष्टि कर लें।
आवेदन को कारण बताते हुए अस्वीकार किया जा सकता है; आवेदक को इसकी सूचना दी जाती है और वह RTPS एक्ट के तहत उपलब्ध अपील प्रक्रिया (अनुमंडल अधिकारी/जिला अधिकारी) का सहारा ले सकता है, या किसी समस्या के समाधान होने पर दोबारा आवेदन कर सकता है।
अगर तय समय-सीमा (SLA) के अंदर सर्टिफ़िकेट जारी नहीं किया जाता है, तो आप अपने सिटिज़न डैशबोर्ड पर स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं और बिहार वन पोर्टल के ज़रिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
आप अपने सिटिज़न डैशबोर्ड से या प्रोसेसिंग के हर चरण पर भेजे जाने वाले SMS/WhatsApp/ईमेल नोटिफ़िकेशन के ज़रिए एप्लीकेशन का रियल-टाइम स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं।
बिहार वन अहम पड़ावों — जैसे सबमिशन, वेरिफिकेशन, मंज़ूरी/अस्वीकृति और सर्टिफ़िकेट जारी होने — पर SMS और ईमेल के ज़रिए नोटिफ़िकेशन भेजता है।
एक बार मंज़ूरी मिलने के बाद, डिजिटल रूप से साइन किया गया सर्टिफ़िकेट (आधार-आधारित eSign का इस्तेमाल करके) आपके सिटिज़न डैशबोर्ड से डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध हो जाता है और आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर भी भेजा जाता है।
आप सीधे पोर्टल के 'शिकायत दर्ज करने और ट्रैक करने' वाले मॉड्यूल के ज़रिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं; यह मॉड्यूल समस्या को अपने-आप कैटेगरी में बांटता है और उसे आगे बढ़ाता है। अगर तय समय-सीमा (SLA) के अंदर सेवा नहीं मिलती है, तो RTPS एक्ट के तहत पहली और दूसरी अपील (क्रमशः अनुमंडल अधिकारी (SDO) और जिला अधिकारी (DM) के पास) करने का कानूनी अधिकार भी मिलता है।
पोर्टल पर गाइडेड सहायता के लिए 24/7 चैटबॉट/वर्चुअल असिस्टेंट उपलब्ध है; जिन सवालों का समाधान नहीं हो पाता, उन्हें CPGRAMS या विभागीय हेल्पडेस्क के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है।
यह एक आधिकारिक रिकॉर्ड है जो आवेदक की जाति श्रेणी (जैसे SC/ST/OBC/General) को प्रमाणित करता है। इसका इस्तेमाल एडमिशन, नौकरी/शिक्षा में आरक्षण और योजनाओं के लिए पात्रता तय करने में किया जाता है।
बिहार का कोई भी निवासी जो अपनी जाति श्रेणी का आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्राप्त करना चाहता है, जिसके लिए आमतौर पर परिवार की वंशावली के रिकॉर्ड या माता-पिता/रिश्तेदार के मौजूदा जाति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होती है।
पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड)
बिहार में निवास का प्रमाण
माता-पिता/परिवार का जाति प्रमाण-पत्र या जाति का कोई अन्य दस्तावेज़ी सबूत (यदि उपलब्ध हो)
पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
अंचल अधिकारी-लेवल की वही सर्विस, लेकिन दो मोड के साथ — जनरल (स्टैंडर्ड RTPS टाइमलाइन) और तत्काल (तेज़, फ़ीस-आधारित)।
अगर अंचल अधिकारी तय समय-सीमा (SLA) के अंदर सर्टिफ़िकेट जारी नहीं करता है, या अगर कोई नागरिक आवेदन नामंजूर होने पर आपत्ति जताता है, तो RTPS एक्ट के तहत ये कानूनी तौर पर पहली और दूसरी अपील के स्तर होते हैं।
हाँ, आरक्षण के मकसद से जाति प्रमाण-पत्र की कानूनी अहमियत को देखते हुए, आम तौर पर मंज़ूरी मिलने से पहले सर्कल ऑफिस द्वारा इसके लिए किए गए आवेदनों की फ़ील्ड या रिकॉर्ड के ज़रिए जाँच की जाती है।
आम तौर पर जनरल मोड के लिए यह मुफ़्त या नाममात्र शुल्क पर होता है, जबकि तत्काल के लिए अतिरिक्त शुल्क लगता है; कृपया मौजूदा शुल्क सूची से इसकी पुष्टि कर लें।
यह आवेदक या उनके परिवार की सालाना आय को प्रमाणित करता है और आमतौर पर स्कॉलरशिप, फीस में छूट, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)/आर्थिक-मानदंड योजना के आवेदनों और लोन सब्सिडी के लिए इसकी ज़रूरत होती है।
बिहार का कोई भी निवासी जिसे किसी सरकारी काम के लिए अपनी (या अपने परिवार की) सालाना आय को प्रमाणित करने की ज़रूरत हो।
पहचान और पते का प्रमाण (आधार कार्ड)
सैलरी स्लिप / फॉर्म 16, या स्वरोज़गार से होने वाली आय का विवरण
ज़मीन के कागज़ात, अगर आय में खेती से होने वाली कमाई शामिल हो
पारिवारिक आय का स्व-घोषणा पत्र
पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
सर्टिफिकेट जारी करने से पहले, सर्कल ऑफिस उपलब्ध रिकॉर्ड (जैसे सैलरी के दस्तावेज़, ज़मीन की जानकारी, बिज़नेस का सबूत) के आधार पर बताई गई आय की जांच कर सकता है।
आम तौर पर इनकम सर्टिफिकेट एक फाइनेंशियल ईयर के लिए मान्य माने जाते हैं और स्कॉलरशिप जैसी बार-बार होने वाली ज़रूरतों के लिए इन्हें हर साल रिन्यू करवाना पड़ता है।
निवास/जाति प्रमाण-पत्रों जैसा ही पैटर्न है: जनरल और तत्काल अंचल अधिकारी-स्तर पर प्रोसेस होने वाले मोड हैं, जबकि अनुमंडल अधिकारी और जिला अधिकारी लेवल RTPS एक्ट के तहत पहली और दूसरी कानूनी अपील अथॉरिटी के तौर पर काम करते हैं।
यह सर्टिफ़िकेट इस बात की पुष्टि करता है कि आवेदक 'आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग' (EWS) कैटेगरी में आता है — यानी, वह SC/ST/OBC रिज़र्वेशन के दायरे में नहीं आता और उसकी पारिवारिक आय/संपत्ति तय सीमा से कम है — जिससे वह शिक्षा और सरकारी नौकरी में 10% EWS रिज़र्वेशन का पात्र बन जाता है।
सामान्य श्रेणी के वे आवेदक जिनके परिवार की कुल सालाना आय और संपत्ति (ज़मीन, घर आदि) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण योजना के तहत तय सीमा के भीतर है।
पहचान और पते का प्रमाण (आधार कार्ड)
परिवार की आय का प्रमाण-पत्र / सभी स्रोतों से होने वाली आय का स्व-घोषणा पत्र
ज़मीन और संपत्ति के मालिकाना हक का विवरण
पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) सर्टिफिकेट आम तौर पर एक फाइनेंशियल ईयर के लिए मान्य होते हैं और इनका इस्तेमाल जारी रखने के लिए (जैसे, बाद के एकेडमिक ईयर या भर्ती साइकल के लिए) इन्हें हर साल रिन्यू कराना ज़रूरी होता है।
दूसरे RTPS सर्टिफ़िकेट की तरह ही, अगर अंचल अधिकारी पर किए गए आवेदन में SLA से ज़्यादा देरी होती है या उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है, तो ये कानूनी तौर पर पहली और दूसरी अपील अथॉरिटी का काम करते हैं।
यह सर्टिफ़िकेट इस बात की पुष्टि करता है कि OBC आवेदक का परिवार "क्रीमी लेयर" के दायरे में नहीं आता है (यानी, उनकी आय/स्टेटस तय सीमा से कम है), जिससे वे शिक्षा और रोज़गार में OBC आरक्षण का लाभ पाने के योग्य हो जाते हैं।
राज्य और केंद्र सरकार की भर्ती/एडमिशन प्रक्रियाओं में 'क्रीमी-लेयर' आय की अलग-अलग सीमाएँ और वैधता अवधि लागू होती हैं, इसलिए नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) सर्टिफिकेट अलग-अलग जारी किए जाते हैं - यह इस बात पर निर्भर करता है कि सर्टिफिकेट का इस्तेमाल राज्य (बिहार सरकार) के काम के लिए होगा या केंद्र (भारत सरकार) के काम के लिए।
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के वे आवेदक, जिनकी पारिवारिक आय/स्थिति संबंधित (राज्य या केंद्र) उद्देश्य के लिए लागू 'क्रीमी-लेयर' सीमा से कम है।
पहचान और पते का प्रमाण (आधार कार्ड)
OBC स्टेटस की पुष्टि करने वाला जाति प्रमाण-पत्र
परिवार की आय का प्रमाण-पत्र / माता-पिता की आय और नौकरी का विवरण
पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
नॉन-क्रीमी लेयर (NCL) सर्टिफिकेट आम तौर पर जारी होने की तारीख से एक फाइनेंशियल ईयर के लिए मान्य होते हैं और इन्हें हर साल रिन्यू कराना ज़रूरी होता है, क्योंकि क्रीमी-लेयर स्टेटस का आकलन मौजूदा इनकम/स्टेटस के आधार पर किया जाता है।
ये RTPS एक्ट के तहत पहली और दूसरी कानूनी अपील के स्तर हैं। इनका इस्तेमाल तब किया जाता है जब अंचल अधिकारी, SLA के अंदर सर्टिफ़िकेट जारी नहीं करता है या जब कोई आवेदक किसी रिजेक्शन (अस्वीकृति) को चुनौती देना चाहता है।
बिहार वन, बिहार सरकार का नागरिकों को सेवाएँ देने वाला एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म है। यह अलग-अलग विभागों की RTPS और नॉन-RTPS सेवाओं को एक साथ लाता है और इसे 'बिहार कॉमन सोशल रजिस्ट्री' (BCSR) तथा 'बिहार पहचान ID' नाम की नागरिकों की एक खास पहचान का समर्थन प्राप्त है।
हाँ। नागरिक को बिहार वन पोर्टल पर एक बार रजिस्ट्रेशन / प्रोफ़ाइल बनानी होगी।
आप अपने आधार नंबर या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP का इस्तेमाल करके लॉग इन कर सकते हैं। इसमें सभी सेवाओं के लिए मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) और सिंगल साइन-ऑन (SSO) की सुविधा मिलती है।
हाँ। बिहार वन 'असिस्टेड मोड' (सहायता-प्राप्त मोड) को सपोर्ट करता है, जिसके ज़रिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ऑपरेटर या अधिकृत एजेंट नागरिकों की ओर से आवेदन जमा कर सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहाँ डिजिटल सुविधाएँ सीमित हैं।
यह बिहार पर्यटन विभाग द्वारा होटल का आधिकारिक वर्गीकरण/पंजीकरण है, जो यह प्रमाणित करता है कि होटल ठहरने की सुविधा, सुरक्षा और मेहमान-नवाज़ी की सेवाओं के लिए तय मानकों को पूरा करता है।
बिहार में चल रहा कोई भी होटल, गेस्ट हाउस या रहने की जगह, जो पर्यटन विभाग से आधिकारिक तौर पर मान्यता या लिस्टिंग पाना चाहता है (जिसमें पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाओं और फायदों के लिए पात्रता भी शामिल है)।
प्रॉपर्टी के मालिकाना हक या लीज़ का सबूत
ट्रेड लाइसेंस / दुकानों और प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन
फ़ायर सेफ़्टी और बिल्डिंग-प्लान की मंज़ूरी/NOC
कमरों, सुविधाओं और टैरिफ़ स्ट्रक्चर की जानकारी
प्रॉपर्टी और सुविधाओं की तस्वीरें
बिज़नेस एंटिटी का PAN और GST रजिस्ट्रेशन
मौजूदा मान्यता प्रमाण-पत्र (पिछला चक्र)
अपडेट किया गया ट्रेड लाइसेंस / कानूनी NOC (अगर रिन्यू किया गया हो)
पिछली मान्यता के बाद से मालिकाना हक, सुविधाओं या टैरिफ में कोई बदलाव
रिन्यूअल फ़ीस के भुगतान का सबूत
हाँ, मान्यता (और अक्सर नवीनीकरण) के लिए पर्यटन विभाग के अधिकारियों या किसी अधिकृत एजेंसी द्वारा प्रॉपर्टी का भौतिक निरीक्षण किया जाता है, ताकि बताई गई सुविधाओं और मानकों की पुष्टि की जा सके।
मान्यता आमतौर पर एक निश्चित अवधि (श्रेणी के आधार पर, आमतौर पर 1-3 साल) के लिए दी जाती है; मान्यता का दर्जा खत्म होने से बचने के लिए, होटल को मौजूदा मान्यता की अवधि समाप्त होने से पहले ही इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन करना चाहिए।
जी हां, मान्यता और नवीनीकरण दोनों के लिए एक निर्धारित शुल्क लगता है जो होटल की श्रेणी/स्टार रेटिंग के अनुसार अलग-अलग होता है; सटीक राशि की पुष्टि पर्यटन विभाग की वर्तमान शुल्क अनुसूची से की जानी चाहिए।
होटल का मान्यता प्राप्त दर्जा खत्म हो सकता है, जिससे टूरिज़्म स्कीम के फ़ायदों और आधिकारिक लिस्टिंग के लिए पात्रता पर असर पड़ सकता है; दर्जा खत्म होने के बाद, विभाग के नियमों के आधार पर, मान्यता के लिए नए सिरे से आवेदन (सिर्फ़ रिन्यूअल के बजाय) करने की ज़रूरत पड़ सकती है।
यह पर्यटन विभाग का आधिकारिक सर्टिफ़िकेशन है कि यह बिज़नेस तय योग्यता और सर्विस-क्वालिटी के नियमों का पालन करते हुए बिहार में टूर ऑपरेटर या ट्रैवल एजेंट के तौर पर काम करने के लिए अधिकृत है।
बिहार में टूर, ट्रैवल पैकेज, टिकटिंग या उससे जुड़ी टूरिज़्म सर्विस का काम करने वाली कोई भी बिज़नेस कंपनी, जो टूरिज़्म डिपार्टमेंट से आधिकारिक मान्यता पाना चाहती है।
बिज़नेस रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (फ़र्म/कंपनी/LLP)
PAN और GST रजिस्ट्रेशन
ऑफ़िस की जगह का सबूत (ओनरशिप/लीज़)
स्टाफ़, दी जाने वाली सेवाओं और टाई-अप (ट्रांसपोर्ट, रहने की जगह, वगैरह) की जानकारी
लागू टूरिज़्म ट्रेड नियमों का पालन करने का हलफ़नामा/घोषणा-पत्र
पिछले साइकल का मौजूदा मान्यता प्रमाण-पत्र
अपडेट किया गया बिज़नेस रजिस्ट्रेशन/GST विवरण (अगर कोई बदलाव हुआ हो)
नवीनीकरण शुल्क के भुगतान का प्रमाण
पिछली मान्यता अवधि के दौरान शिकायतों/समस्याओं का कोई रिकॉर्ड (जहाँ लागू हो)
हाँ, मान्यता और नवीनीकरण दोनों के लिए एक तय फ़ीस लगती है; सही रक़म की पुष्टि पर्यटन विभाग की मौजूदा फ़ीस सूची से कर लेनी चाहिए।
मान्यता आमतौर पर एक निश्चित अवधि (आमतौर पर 1-3 साल) के लिए दी जाती है; मान्यता का दर्जा बिना किसी रुकावट के बनाए रखने के लिए, बिज़नेस को मान्यता की अवधि खत्म होने से पहले ही इसके नवीनीकरण (रिन्यूअल) के लिए आवेदन करना चाहिए।
मान्यता प्राप्त टूर ऑपरेटर/ट्रैवल एजेंट आमतौर पर पर्यटन विभाग के आधिकारिक चैनलों पर लिस्टिंग, पर्यटन को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने और लागू होने पर संबंधित योजनाओं के लाभ पाने के पात्र होते हैं।
आपको रिजेक्शन का कारण बताया जाएगा और कमी को दूर करने के बाद आप दोबारा आवेदन कर सकते हैं; प्रोसेसिंग में देरी से जुड़ी शिकायतों को 'बिहार-वन ग्रीवेंस फाइलिंग एंड ट्रैकिंग मॉड्यूल' के ज़रिए दर्ज कराया जा सकता है।
पंजीकृत लाभार्थियों के पात्र बच्चे या आश्रित, बशर्ते वे योजना के तहत निर्धारित शैक्षिक और पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।
योग्यता, स्कीम की गाइडलाइंस के तहत बताए गए क्लास, कोर्स या शिक्षण संस्थानों पर निर्भर करती है।
हाँ, अगर प्रोफेशनल कोर्स योग्य एजुकेशनल प्रोग्राम की नोटिफ़ाइड लिस्ट में शामिल हैं।
हाँ। अगर स्कीम के नियमों के तहत इजाज़त हो, तो एक से ज़्यादा पात्र बच्चों को मदद मिल सकती है।
हाँ। सहायता आम तौर पर मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक ही सीमित होती है।
सहायता जारी रखना योजना में बताई गई शैक्षणिक शर्तों पर निर्भर करता है।
नवीनीकरण या जारी रखने की शर्तें योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार तय होती हैं।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या योजना एक साथ कई स्कॉलरशिप लेने की अनुमति देती है।
अगर लाभार्थी अब पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो स्कॉलरशिप की मदद बंद की जा सकती है।
हाँ, लगातार पात्रता की पुष्टि और किसी अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान में नामांकन के आधार पर।
यह योजना किसी रजिस्टर्ड लाभार्थी के पात्र परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, यदि लाभार्थी की मृत्यु 'बिहार शताब्दी योजना, 2024' के तहत शामिल पात्र कारणों से होती है।
यह सहायता आम तौर पर योजना के तहत तय किए गए अनुसार, मृतक रजिस्टर्ड लाभार्थी के कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त नॉमिनी या पात्र आश्रित को दी जाती है।
नहीं। पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि लाभार्थी योजना के तहत बताई गई रजिस्ट्रेशन और कवरेज की शर्तों को पूरा करता है या नहीं।
नहीं। आम तौर पर, स्कीम के नियमों के तहत तय किए गए योग्य नॉमिनी या कानूनी दावेदार को ही लाभ दिया जाता है।
नहीं। पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या मौत स्कीम के तहत बताई गई शर्तों और अपवादों के दायरे में आती है।
स्कीम के प्रावधानों और सहायक कानूनी दस्तावेजों के आधार पर, पात्र कानूनी उत्तराधिकारी (उत्तराधिकारियों) के पक्ष में दावे पर विचार किया जा सकता है।
नहीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की ज़रूरत सिर्फ़ उन मामलों में होती है जहाँ स्कीम के तहत ऐसा ज़रूरी हो या मौत की वजह का पता लगाने के लिए यह ज़रूरी हो।
हाँ। गलत जानकारी देने या ज़रूरी तथ्यों को छिपाने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है और कानून के अनुसार दूसरी कार्रवाई भी हो सकती है।
नहीं। जब तक विशेष रूप से ऐसा न कहा गया हो, इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता, अन्य पात्र कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को अपने-आप सीमित नहीं करती है।
हाँ। सक्षम अधिकारी सहायता मंज़ूर करने से पहले आधिकारिक रिकॉर्ड, स्थानीय जाँच, मेडिकल दस्तावेज़ों या अन्य सबूतों के ज़रिए दावे की पुष्टि कर सकते हैं।
दुर्घटना से लगी वे चोटें पात्र हैं जो 'बिहार शताब्दी योजना, 2024' के दायरे में आती हैं।
ज़रूरत इस बात पर निर्भर करती है कि चोट कितनी गंभीर है और स्कीम के तहत कौन से दस्तावेज़ी सबूत ज़रूरी बताए गए हैं।
सिर्फ़ वही चोटें इस स्कीम के तहत तय पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं, उन्हें ही इसमें शामिल किया जाता है।
कवरेज इस बात पर निर्भर करता है कि घटना की जगह और लाभार्थी की पात्रता के बारे में स्कीम में क्या प्रावधान हैं।
एक से ज़्यादा दावों पर स्कीम में बताई गई सीमाएँ और शर्तें लागू होती हैं।
हाँ। मदद मंज़ूर करने से पहले अथॉरिटी पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट, एम्प्लॉयर रिकॉर्ड या दूसरे सबूतों की जाँच कर सकती है।
सिर्फ़ सर्जरी से ही पात्रता तय नहीं होती; चोट को स्कीम की शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है।
योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या योजना बीमा मुआवज़े के साथ-साथ सहायता की भी अनुमति देती है।
भुगतान का तरीका योजना के संचालन संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार तय होता है।
हाँ। योजना के तहत तय की गई स्थायी विकलांगता की श्रेणी या प्रतिशत के आधार पर सहायता की राशि अलग-अलग हो सकती है।
हाँ। जहाँ अनुमति हो, सक्षम अधिकारी मेडिकल सर्टिफ़िकेट के बारे में संदेह होने पर दोबारा जाँच का आदेश दे सकते हैं।
नहीं। आम तौर पर मदद सिर्फ़ स्कीम की कवरेज अवधि के दौरान हुई पात्र घटनाओं से होने वाली विकलांगता के लिए ही मिलती है।
हाँ। सक्षम अधिकारी सहायता मंज़ूर करने से पहले अतिरिक्त मेडिकल सत्यापन की माँग कर सकते हैं।
नहीं। ये फ़ायदे अलग-अलग स्थितियों पर लागू होते हैं और आम तौर पर एक ही लाभार्थी घटना के लिए इनका दावा नहीं किया जा सकता।
नहीं। यह सेवा खास तौर पर स्थायी विकलांगता के लिए है। अस्थायी चोटें तभी कवर की जाती हैं, जब वे किसी दूसरी योजना के तहत आती हों।
विकलांगता को सक्षम मेडिकल बोर्ड या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए।
आंशिक या पूरी तरह से स्थायी विकलांगता के लिए पात्रता, योजना के तहत निर्धारित प्रावधानों और विकलांगता के मानदंडों के आधार पर तय की जाती है।
स्थायी विकलांगता का मतलब है, स्कीम के तहत आने वाली किसी दुर्घटना या घटना के कारण शारीरिक या कार्यात्मक क्षमता का चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित स्थायी नुकसान।
केवल 'बिहार शताब्दी योजना' के तहत विशेष रूप से अधिसूचित बीमारियों के लिए ही सहायता मिल सकती है।
राज्य के बाहर इलाज, योजना में बताई गई शर्तों के अधीन है।
बार-बार मिलने वाली सहायता, बीमारी के दोबारा होने या लगातार इलाज से जुड़ी योजना की शर्तों पर निर्भर करती है।
इस योजना के लिए किसी अधिकृत चिकित्सा संस्थान से जांच या प्रमाणन की आवश्यकता हो सकती है।
फ़ॉलो-अप इलाज के लिए पात्रता, अधिसूचित योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार तय होती है।
दवाओं का कवरेज योजना के तहत तय किए गए स्वीकार्य खर्च पर निर्भर करता है।
एक से अधिक बीमारियों के लिए सहायता, योजना के तहत निर्धारित सीमाओं और शर्तों के अधीन है।
रीइम्बर्समेंट, स्कीम के तहत तय की गई शर्तों और समय-सीमा पर निर्भर करता है।
डिजीलॉकर
डिजीलॉकर के ज़रिए अपने सरकारी दस्तावेज़ सुरक्षित रूप से एक्सेस करें।
दस्तावेज़ों तक पहुँचेंअपना आवेदन ट्रैक करें
कृपया अपना आवेदन संदर्भ संख्या दर्ज करें।
प्रमाण पत्र डाउनलोड करें
कृपया अपना आवेदन संदर्भ संख्या दर्ज करें।