पीएम विश्वकर्मा योजना: पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाना
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के समन्वय से बिहार सरकार ने पीएम विश्वकर्मा योजना के रोलआउट की घोषणा की है। यह प्रमुख कार्यक्रम अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले व्यक्तियों को सहयोग देने के लिए समर्पित है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे आधुनिक मूल्य श्रृंखला में एकीकृत हों।
1. योजना के उद्देश्य
मुख्य लक्ष्य कारीगरों (विश्वकर्माओं) को उनके उत्पादों की गुणवत्ता, पैमाने और पहुंच में सुधार के लिए एंड-टू-एंड सहायता प्रदान करना है। इसमें वित्तीय सहायता, उन्नत कौशल प्रशिक्षण, और ब्रांड प्रचार शामिल है।
2. कौन पात्र है?
निम्नलिखित 18 पारंपरिक व्यवसायों में काम करने वाले कारीगर BiharOne पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने के पात्र हैं:
- बढ़ई (सुथार)
- नाव बनाने वाला
- शस्त्रकार (Armourer)
- लोहार
- हथौड़ा एवं टूल किट निर्माता
- ताला बनाने वाला (Locksmith)
- सुनार
- कुम्हार
- मूर्तिकार
- चर्मकार
- राजमिस्त्री
- टोकरी/चटाई/झाड़ू बनाने वाला
- गुड़िया एवं खिलौना निर्माता
- नाई
- मालाकार
- धोबी
- दर्जी
- मछली पकड़ने का जाल बनाने वाला
3. मुख्य लाभ
- पहचान: पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र (ID Card) का प्रावधान।
- कौशल उन्नयन: बुनियादी प्रशिक्षण (5-7 दिन) और उन्नत प्रशिक्षण (15 दिन या अधिक), जिसमें प्रतिदिन ₹500 का वजीफा दिया जाएगा।
- टूलकिट प्रोत्साहन: आधुनिक टूलकिट खरीदने के लिए ₹15,000 तक का अनुदान।
- ऋण सहायता: दो किश्तों (₹1 लाख और ₹2 लाख) में ₹3 लाख तक का बिना जमानत (Collateral-free) 'एंटरप्राइज़ डेवलपमेंट लोन', 5% की रियायती ब्याज दर पर।
4. BiharOne पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज़
- आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक)
- बैंक खाता विवरण (पासबुक)
- राशन कार्ड (परिवार सत्यापन के लिए अनिवार्य)
- सक्रिय मोबाइल नंबर
5. आवेदन कैसे करें
कारीगर किसी भी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जा सकते हैं या BiharOne पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। पंजीकरण में 3-चरणीय सत्यापन प्रक्रिया शामिल है: ग्राम पंचायत/शहरी स्थानीय निकाय (ULB) स्तर, जिला स्तर, और अंत में समिति द्वारा स्क्रीनिंग।